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अमरूद की खेती कैसे करें, नमस्कार दोस्तों आज  कि हमारी इस पोस्ट में आपका स्वागत है, आज हम बात करने वाले हैं मटर की खेती के बारे में, हम आपको बताने वाले हैं कि आप किस तरीके से अमरूद की खेती कर सकते हैं और अमरूद की खेती करने के लिए आपके पास किस तरह की भूमि होनी चाहिए और अमरूद की खेती किस प्रकार की जाती है और उपयुक्त बीज के बारे में सारी जानकारियां देने वाले हैं। 

अमरूद का फल बहुत ही स्वादिष्ट होता है, अमरुद को गरीब का सेब जाता है। अमरुद खाने में भी होता है इसमें बहुत सारे पोषक तत्व होते हैं जो हमारे शरीर के लिए लाभदायक होते है। अमरूद के फल में विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, किसान अमरूद की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के लिए करते हैं। 

हमारे देश की जलवायु अमरुद के उत्पादन के लिए बहुत ही ज्यादा लाभदायक है, अमरूद के उत्पादन में हमारे देश का विश्व में चौथा स्थान है। हमारे देश में बहुत सी जगह पर अमरूद की खेती की जाती है अमरूद की खेती करने के लिए बहुत ही कम लागत लगती है और न वो काफी ज्यादा जाता है। 

आज की मरीज पोस्ट में हम आपको मरूद की खेती कैसे करेंअ, इसके बारे में सारी जानकारी विस्तार से देने वाले हैं आप हमारे इस पोस्ट को लास्ट तक जरूर पढ़ें। 

अमरूद की खेती कैसे करें

अमरूद की खेती करने के लिए हमें शुष्क जलवायु की आवश्यकता होती है, अमरूद के फलों को पकाने के लिए 15 से 30 डिग्री सेंटीमीटर तापमान की जरूरत रहती है, इससे ज्यादा  तापमान में अमरूद का फल बिल्कुल सही स्थिति में नहीं पकता है। अमरूद की खेती करने के लिए आपके पास पर्याप्त भूमि होना चाहिए और पानी का स्टोरेज होना चाहिए, अमरूद की खेती करने के लिए अमरुद को ज्यादा तापमान की आवश्यकता नहीं होती है, मौसम और तापमान में उतार-चढ़ाव के समय भी अमरुद अपनी सहनशीलता के कारण बड़वार करता रहता है। 

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जलवायु और तापमान

अमरूद की खेती करने के लिए आपके पास किसी भी तरह की कोई भी भूमि हो और कितना भी तापमान हो अमरूद का पौधा अच्छे तरीके से  बड़वार करता है। अमरूद का पौधा हमारे भारतीय जलवायु में इस तरीके से घुलमिल गए हैं कि आप इस पौधे को कहीं भी और किसी भी तरीके की भूमि में लगा सकते हैं। यह पौधा आपको उसी भूमि में अच्छी पैदावार देगा। अमरूद की खेती करने के लिए आपको किसी एक निरंतर तापमान की आवश्यकता नहीं होते क्योंकि अमरूद का पौधा सहनशीलता युक्त पौधा है वह किसी भी तापमान में अपने अनुकूलित डाल लेता है

उपयुक्त भूमि

अमरूद की खेती करने के लिए आपके पास किसी भी तरह की कोई भी भूमि हो, आप की भूमि से जल भाव होता हो या नहीं होता उसका कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि  अमरूद का पौधा सहनशीलता युक्त पौधा है। यह सभी तरह के मौसम में और सभी तरह की भूमि में अपने आप को ताकतवर बनाए रखता है और सभी तरह की भूमि में है लग जाता है। 

अगर आप अमरूद की खेती करके अच्छा लाभ कमाना चाहते हैं और आप इसे व्यापारिक तरीके से खेती करना चाहते हैं,तो अमरूद की खेती करने के लिए आपके पास   ब्लूई और दोमट मीठे होनी चाहिए, यह पौधा चिकनी मिट्टी में भी अच्छी बड़वार करता है और अच्छे तरीके से फल को पकाता है।

उन्नत किस्में

जब आप अमरूद की खेती करते हैं तो उसे पहले आपको अमरूद की उन्नत किस्मों के बारे में जानकारी होना अति आवश्यक है, अगर आप अपने घर पर खाने के लिए उनके एक तो पेड़ लगाना चाहते हैं तो आप किसी भी तरीके कोई भी चीज संभाल करके लगा सकते हैं अगर आप बड़े पैमाने पर व्यापारिक तरीके से अमरूद की खेती करना चाहते हैं तो आपको इसके लिए  आपके पास उन्नत गुणवत्ता वाला बीज होना चाहिए। 

हम आपको नीचे कुछ उन्नत बीज के बारे में बताने वाले हैं आप इन सभी बीज का इस्तेमाल करके अपने खेत में तैयार करके अमरूद की उन्नत किस्म लगाकर अच्छा लाभ कमा सकते हैं।

पंजाब पिंक –

इस किस्म के सभी फलों का आकार बड़ा और थोड़ा हल्का गुलाबी रंग का होता है, इसके गुड्डे का रंग लाल होता है और इसमें बीज की मात्रा थोड़ी कम होती है। अगर अपने इसकी सालाना उत्पादन क्षमता की बात करें तो यह किसान 155 किलो प्रति पौधे के हिसाब से उत्पादन देती है।

इलाहाबाद सफेद –

इस किस्म के पोधों में फल का आकार छोटा होता है और उसका रंग थोड़ा हल्का हरा और सफेद सा होता है इसके गुर्दे का रंग बिल्कुल सफेद होता है और इसमें आकर्षक मनमोहक खुशबू आती है, अगर इसकी उत्पादन क्षमता की बात करें तो प्रति पौध 80 से 100 किलो उत्पादन देता है। 

श्वेता –

इस मिशन के फल का आकार थोड़ा बड़ा होता है, और इसका गूदा क्रीमी सफेद रंग का होता है इसमें 10 से 11  प्रतिशत सुक्रोज पाए जाते हैं।अगर उत्पादन क्षमता की बात करें तो प्रति पौधा 151 किलो फल देता है। 

खेत की तैयारी

फसल बोने से पहले आपको अपने खेत की अच्छी तरीके से जुताई कर लेनी है, मटर की बुवाई से पहले आपने भी दूसरी फसल को बो रखा है उसको काट कर और उसमें है फसल का सारा कचरा बाहर निकाल देना है और उसमें पाटा लगाकर पूरी जमीन को समतल कर लेना है, जमीन को इस तरीके से समतल कर लेना है जिसे पानी की निकासी आसानी से हो जाए।  

जमीन को समतल करने के बाद आपको पौधे से पौधे की दूरी और  नाली से नाली की दूरी को नाप कर आपको गड्ढे खोदने और गड्ढों के अंदर खाओ और कुछ रसायनिक तत्वों मिलाकर मिट्टी से भर देना और बाद में पूरे खेत में पानी लगा देना। 

बुवाई का समय और तरीका

अमरुद के पौधे की बुवाई मार्च अप्रैल और अगस्त सितंबर  महीने में की जाती है, अमरूद का पौधा लगाने के लिए आप बीज का इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर आप को पहले वह करने तैयार करके बाद में उन पौधों को गड्ढों में लगा सकते हैं जब आप पौधों को लगाते हैं उसमें आप वर्गाकार स्थिति में भी पौधे लगा सकते हैं। हिंदी में पौधे से पौधे की दूरी और नाली से नाली की दूरी 15 * 20 फिट होनी चाहिए। 

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पौधे की सिंचाई-

अमरुद के पौधे में सिंचाई जब को लगाते हैं तो उसके तीन से चार दिन बाद आपको पहले सिंचाई करनी पड़ती है और दूसरे संचाई 8 से 10 दिन के बाद करनी पड़ती है बाकी अगर मौसम बारिश वाला है और मौसम में ज्यादा गर्मी नहीं है तो आप इसकी सिंचाई 10 से 12 दिन के बाद भी कर सकते हैं, जब आप का पौधा एक से डेढ़ साल का हो जाता है तो आप 20 से 25 दिन के अंतराल में भी सिंचाई कर सकते हैं

खाद की मात्रा 

जब अमरुद के पौधे की खेती करते हैं तो आपको पौधा लगाने से पहले पूरे खेत में गोबर की शैली के लिए खाद को डाल देना और पूरे खेत में बिखरा का खेत को पानी से भर देना है उसके बाद आप रसायनिक खाद का इस्तेमाल में 10 किलो यूरिया और 5 किलो पोटाश का इस्तेमाल कर सकते हैं इससे ज्यादा रसायनिक खाद का उपयोग न करें, जब आप का पौधा 1 से 3 साल का हो जाता है तो आप 20 किलो यूरिया और तीसरे 40 किलो गोबर की सड़ी गली खाद पूरे खेत में बिखार सकते हैं। 

खरपतवार नियंत्रण

अमरुद के पौधे को जब आप अपने खेत में लगा देते हैं तो उसके बाद आपको 20 से 25 दिन के बाद इसकी पहली खुदाई करनी है उसके बाद जब पौधा बड़ा हो जाए 10 से 15 दिनों के बाद आपको इसके नेत्र खुदाई करते रहना है जो भी आपको पौधे के नीचे कुछ खरपतवार दिखाई दे तो आपको उसे तुरंत से हटा देना आपको पौधे के नीचे  खरपतवार को बिल्कुल नहीं होने देता क्योंकि जब अमरुद के पौधे में  खरपतवार अधिक हो जाते हैं तो पौधा आगे बड़वारनहीं करता है

फसल की तुडाई-

अमरुद के पौधे में जब फल  गहरे हरे रंग से हल्के हरे रंग में बदलना शुरू कर देते तो उसके बाद आपको खुद के पौधे से फल की दवाई करवाना अति आवश्यक है क्योंकि जब फल ज्यादा पक जाता है तो वह टूट कर नीचे गिर जाता है और आपका नुकसान होना शुरू हो जाता है। 

निष्कर्ष

दोस्तों आज की हमारी इस पोस्ट में हमने आपको अमरूद की खेती कैसे करें इसके बारे में सारी जानकारी विस्तार से बताई है।  हमें उम्मीद है कि आपको यह जानकारी अच्छे से समझ आई है और आप इस जानकारी को पढ़ने के बाद अमरूद की खेती को आसानी से और सही तरीके से कर सकते हैं।  अगर आपको हमारी यह पोस्ट पढ़ने के बाद अमरूद की खेती करने में कोई भी समस्या आती है तो आप हमें कमेंट करके पूछ सकते हैं हम आपकी समस्या को दूर करने की पूरी कोशिश करेंगे।

 गर आपको हमारी यह पोस्ट अमरूद की खेती कैसे करें पसंद आती है तो आप हमारी इस पोस्ट को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर करें ताकि इस जानकारी को आपके दोस्तों को भी पढ़ने को मिले और वह भी मटर की खेती करके अच्छा लाभ कमा सके। 

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