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मटर की खेती कैसे करें, नमस्कार दोस्तों आज  कि हमारी इस पोस्ट में आपका स्वागत है, आज हम बात करने वाले हैं मटर की खेती के बारे में, हम आपको बताने वाले हैं कि आप किस तरीके से मटर की खेती कर सकते हैं और मटर की खेती करने के लिए आपके पास किस तरह की भूमि होनी चाहिए और मटर की खेती किस प्रकार की जाती है और उपयुक्त  बीज के बारे में सारी जानकारियां देने वाले हैं। 

मटर की खेती साल में एक बार होती है, और वैज्ञानिकों का कहना है कि मटर की खेती करने से भूमि की उर्वरक क्षमता बढ़ती है। मटर की फसल को सब्जी के रूप में इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि खेत में और   उपजाऊ वह में हुए मर्डर की जब हम सब्जी बनाते हैं तो उसका टेस्ट होती अलग रहता है। 

मटर की खेती बहुत ही कम समय में हो जाती है, दूसरों के मुकाबले मटर की खेती 2 से 3 महीने का समय लेती है और दूसरी फसलें 4 से 5 महीने का समय लेती है। कम समय में और अधिक उपज देने वाली फसल की होती है यह भरपूर प्रोटीन युक्त होती है और साथ में जमीन के लिए भी फायदेमंद होती है। 

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मटर की खेती कैसे करें 

मटर की खेती अक्टूबर और नवंबर के महीने में की जाती है, यह फसल सब्जियों में होती है। जब फसल की फलियां पक जाती है, तो उसके बाद में इन फलियों को तोड़कर सब्जी बनाई जाती है और साथ में जब यह फलिया पक जाती है तो उसे सुखाकर दाल के रूप में काम लिया जाता है। मटर की फसल में भरपूर मात्रा में प्रोटीन होता है, और मटर की ज्यादातर खेती हिमाचल प्रदेश पंजाब हरियाणा और बिहार में की जाती है।

जलवायु और तापमान

मटर की खेती के लिए अक्टूबर और नवंबर का महीना सबसे बढ़िया होता है क्योंकि इस महीने में तापमान बहुत ही कम होता है और मटर  के बीच को 22 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर रखा जाता है जब फसल को हो जाता है तो उस समय तापमान 20 से 25 डिग्री होना चाहिए ज्यादा तापमान में यह फसल उगती नहीं है। इस फसल की फलियों में दाने आना शुरू हो जाते हैं उस समय यह फसल 10 से 15 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर रहती है, इस तापमान पर यह फसल अच्छी तरीके से पक जाती है। 

उपयुक्त भूमि

 मटर की खेती करने के लिए अलग अलग तरह की भूमि की आवश्यकता होती है,और वैसे सही उपज लेने के लिए इस फसल के लिए  दोमट मृदा और चिकनी  मृदा  होनी चाहिए, और साथ ही इस तरह की भूमि होना चहिए जिसमें पानी की निकासी आसानी से हो सके। मटर की फसल उगाने के लिए खेत का पीएच मान 6 से 7.5 होना चाहिए। 

उन्नत किस्में

 मटर की फसल के लिए वैसे तो बहुत सारी किस में है आप अपने हिसाब से कोई भी एक समूह को चुन सकते हैं, उसी तरह की  किस्म को चुने जो आपकी  भूमि के लिए लाभदायक हो और आपको अच्छी उपज दे सकें.। वैसे हम आपको नीचे कुछ किस्मों के बारे में जानकारी दे रहे हैं आप उन किसानों का भी इस्तेमाल अपने खेत में कर सकते हैं।

पंजाब 88- 

मटर की इस किस्म को पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया गया है यह गहरे हरे रंग की और लंबी फली की होती है यह पसंद दिनों में पक कर तैयार हो जाती है और इस फसल फली में दाना बिल्कुल मीठा होता है और इसमें दानों की संख्या 8 से 9 होती है। इस फसल की उपज 60 से 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की मानी जाती है। 

मटर अगेता 6-

इस फसल को पंजाब विश्वविद्यालय ने तैयार किया है यह फसल छोटे कद की है,और साथ ही यह अगेती किस्म की फसल है इस फसल की बुवाई आप सितंबर महीने में कर सकते हैं, इस फसल का प्रति क्विंटल के हिसाब से ऊपज कम मानी जाती है। पंजाब विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार यह फसल 20 से 24 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक होती है। 

 मीठी फली- 

मटर की सभी किस्मों में यह की सबसे मीठी किस्म है, इसी कारण इस किस्म का नाम भी मीठी फली रख दिया गया है। यह फसल 90 दिनी में पक कर तैयार हो जाती है। ओर इसकी ओसतन उपज 90 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक मनी ज्यादा है। 

खेत की तैयारी

फसल बोने से पहले आपको अपने खेत की अच्छी तरीके से जुताई कर लेनी है, मटर की बुवाई से पहले आपने भी दूसरी फसल को बो रखा है उसको काट कर और उसमें है रोवाद का सारा कचरा बाहर निकाल देना है और उसमें पाटा लगाकर पूरी जमीन को समतल कर लेना है, जमीन को इस तरीके से समतल कर लेना है जिसे पानी की निकासी आसानी से हो जाए।  

बुवाई का समय और तरीका

मटर की बुवाई का सही समय अक्टूबर और नवंबर का महीना होता है. फसल की बुवाई करने से पहले खेत को समतल करने के बाद उसमें पानी छोड़ देना है उसके बाद आपको जमीन की गहराई में 3 सेंटीमीटर नीचे बीज को लगा देना है बीज से बीज की दूरी 30 सैं.मी. x 50 सैं.मी. रखें।  

 बीज की मात्रा-

मटर की बुवाई करने के लिए आपको 30 से 35 किलो प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होगी। बीच को बोलने से पहले 2 से 3 ग्राम कप्तान रसायनिक लिक्विड से बीज का उपचार कर ले। बीज का सही उपचार करने के बाद ही आप उसको अपने खेत में बोए। उपचार करने के बाद बीज को बोने से बीज की उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी होती है। 

खाद की मात्रा

मटर की खेती करने के लिए आपको ज्यादा खाद की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि मटर की फसल कम ही रसायनिक उर्वरक देने से बढ़ोतरी करती है, फसल की बुवाई के समय 20 किलो यूरिया और 25 किलो फास्फोरस डालनी होती है। 

खरपतवार नियंत्रण

मटर की फसल में खरपतवार को नियंत्रण करने के लिए आपको पहले निराई गुड़ाई 6 से 10 दिनों के अंदर गर्मी है जिसमें मटर के पौधे में एक से दो पत्र बन जाए, और दूसरी निराई गुड़ाई फल आने के बाद करने से फसल की उत्पादकता में काफी ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिलती है। 

फसल की तुडाई-

मटर की फसल में फल आने के बाद इसकी तुड़ाई  7 से 8 दिन के अंतराल में करनी चाहिए, अगर आप इतने अंतराल में फसल की तुडाई करेंगे तो आपको इसमें अधिक उत्पादन और अच्छी क्वालिटी की मटर देखने को मिलेगी। 

निष्कर्ष

दोस्तों आज की हमारी इस पोस्ट में हमने आपको मटर की खेती कैसे करें इसके बारे में सारी जानकारी विस्तार से बताई है।  हमें उम्मीद है कि आपको यह जानकारी अच्छे से समझ आई है और आप इस जानकारी को पढ़ने के बाद मटर की खेती को आसानी से और सही तरीके से कर सकते हैं।  अगर आपको हमारी यह पोस्ट पढ़ने के बाद मटर की खेती करने में कोई भी समस्या आती है तो आप हमें कमेंट करके पूछ सकते हैं हम आपकी समस्या को दूर करने की पूरी कोशिश करेंगे।

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Q. मटर की खेती में कितने पानी लगते हैं?

Ans. मटर की खेती में 3 पानी देने होते है। एक बिजाई करने के बाद दूसरा फल आने पर और तीसरा फक पकने के पर।

Q. मटर में कौन सा खाद देना चाहिए?

Ans. मटर के पोधे में खाद की कमी होने पर  नाइट्रोजन फासफोरस उर्वरक का इस्तेमाल करना चाहिए।

Categories: How To

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